सस्ती शराब, Sasti Sarab
A hypothetical demand to reduce alcohol prices, especially when the nation grapples with health crises, unemployment, and social fragmentation, would be deeply concerning. It forces us to question the societal direction we’re heading in.
शराब हुई सस्ती, इस संबंध में हिंदी में पढने हेतू लेख पूरा पढें।

Some groups might argue that cheaper alcohol could curb illegal liquor sales and boost government revenue. However, health experts and social workers firmly believe the opposite: it would likely increase addiction, domestic violence, diseases, and accidents.
The adage “Cheaper alcohol means cheaper lives” rings true. Alcohol, a known intoxicant, becoming more affordable would only make addiction more accessible, not offer a solution. The impoverished, already struggling with daily needs, would risk spending a significant portion of their limited income on alcohol.
While such a demand hasn’t emerged yet, if it were to in the future, it could prove devastating for society. This isn’t just about revenue or illegal sales; it’s fundamentally about public health and social well-being. Supporting such a proposition would be a dangerous misstep, as it merely facilitates addiction rather than addressing underlying societal issues.
A recent report highlights the alarming growth in alcohol consumption across India:
- 18% of Indian men and 1.5% of women consume alcohol regularly.
- Hundreds of thousands of deaths occur every year due to alcohol-related issues.
- There’s been a sharp rise in alcohol-linked road accidents, liver cirrhosis cases, and incidents of domestic violence.
❌ Major Harms of Alcohol Consumption:
- Health Impact: Liver failure, heart diseases, mental disorders.
- Social Conflicts: Domestic violence, family disputes, divorces.
- Economic Loss: A large portion of household income spent on alcohol.
- Legal Issues: Drunk driving, brawls, and increased criminal behavior.
## 🧓🏼 **अब कहानी उस पियक्कड़ की, जो देखता है एक अजीब सपना…**
रामसरन, एक 45 साल का मज़दूर, हर शाम दो पैग पीने के बाद ही चैन की सांस लेता है। ज़िंदगी का सारा दुख जैसे शराब की बोतल में घुल जाता है।
एक दिन… चुनाव नज़दीक थे… और वो गली के नुक्कड़ पर बैठे सोच रहा था कि महंगाई से तो दारू भी अब अमीरों की चीज़ हो गई है।
**”सस्ती होती तो क्या बात होती…”**
यही सोचते-सोचते रामसरन की आँख लग जाती है और शुरू होता है उसका **सपनों का अध्भुत संसार**…
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## 💤 **सपना – जब चुनावी मौसम ने बदल दी किस्मत!**
सुबह होती है, और अख़बार की हेडलाइन चमक रही होती है:
> 📰 **“ब्रेकिंग न्यूज़: चुनाव से पहले शराब सस्ती, कीमतों में 25.75% की गिरावट!”**
रामसरन की नींद जैसे ही खुलती है, वह खुद को एक सुनहरी दुनिया में पाता है —
**हर गली में शराब की दुकानें, और हर दुकान पर भारी भीड़!**
> **”मंहगाई गई तेल लेने,
> अब तो बोतल आई खेलने!”**
## 💭 **सपने की दुनिया में रामसरन की मस्ती**
रामसरन नए जोश में दुकान पर पहुँचता है। वहां लिखा होता है:
> 🍾 “₹100 की बोतल अब मात्र ₹74.25 में!”
> 🎁 “2 लो, 1 फ्री पाओ – चुनाव स्पेशल ऑफर!”
वो हंसता है, गाता है और कहता है:
> **”सरकार की मेहरबानी है प्यालों पर,
> अब कोई रात न होगी सवालों पर!”**
पियक्कड़ों की पंचायत लगती है। सब खुश हैं। रामसरन को लगने लगता है कि ये सरकार तो **”जनता की असली हितैषी”** है।
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## 📢 **सपने में प्रचार शुरू**
हर नेता का नया नारा:
> 🗣️ **“हर वोट के बदले एक बोतल – लोकतंत्र का असली मर्म!”**
रामसरन को टिकट भी मिल जाता है, वो अपने मोहल्ले में बोतल बांटने लगता है।
> **”अबके बार… शराब बहार!”**
बुजुर्ग कहते हैं:
> “बेटा ये चुनाव नहीं, मय का त्योहार है।”
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## 😵 **पर अचानक… सपना टूटता है!**
एक हंगामे की आवाज़ आती है, रामसरन देखता है – अस्पताल में लंबी लाइन लगी है। सभी लीवर की बीमारी से परेशान हैं।
कोई बच्चा कहता है –
**”पापा ने आज फिर स्कूल फीस शराब में उड़ा दी…”**
वो देखता है कि उसका ही बेटा, जो स्कूल टॉपर था, अब रिक्शा चला रहा है… क्योंकि बाप की लत ने घर बर्बाद कर दिया।
### 🥀 **अब रामसरन जाग जाता है… पसीने-पसीने।**
> **”ये क्या देख लिया मैंने…?
> मस्ती का सपना, बर्बादी की हकीकत!”**
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### 📌 **कुछ कटाक्षपूर्ण पंक्तियाँ:**
> **”मत दो वो चीज़ जो जान ले जाए,
> नशा सस्ता हुआ तो होश महंगे पड़ जाएं!”**
## ✅ **निष्कर्ष: मस्ती के नाम पर मत भूलो ज़िम्मेदारी**
शराब सस्ती होने से कुछ लोगों को खुशी मिलती है, लेकिन उस खुशी की कीमत कोई और चुका रहा होता है – परिवार, बच्चे, समाज।
रामसरन का सपना सिर्फ एक व्यंग्य नहीं, एक आइना है उस समाज का जहाँ **नशे को वोट बैंक** बना दिया गया है।
### ✨ **अंतिम पंक्तियाँ:**
> **”हकीकत से दूर जो सपना था प्याला,
> उसी ने ले ली सबसे बड़ी हाला।
> चुनावी जश्न में जो बहा बहाव,
> उसने कर दिया पूरा समाज ख़राब!”**
Disclaimer – यह सामग्री रचनात्मक अभिव्यक्ति के तहत एक व्यंग्य के तौर पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य किसी भी विशिष्ट समूह, सरकार या विचारधारा को लक्षित करना नहीं है, बल्कि एक काल्पनिक परिदृश्य के माध्यम से सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है। इसमें दिए गए सभी आंकड़े और बयान केवल प्रतीकात्मक हैं। शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।